राजकुमार – आगर मालवा। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता, अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से ईंधन बचाने की अपील करते हैं। इस अपील से प्रेरणा लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले की 13 गाड़ियों में से 05 गाड़ियों को घटाकर 08 गाड़ियां कर दीं। यह कदम मुख्यमंत्री के उस मूल विजन को दर्शाता है, जिसके तहत वे वीआईपी संस्कृति को कम कर प्रशासन को सीधे आम जनता से जोड़ने और शासकीय खर्चों में कटौती करने का प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन आगर मालवा में इसका ठीक उल्टा ही असर देखने को मिल रहा है। यहां शुक्रवार को ग्राम पंचायत भ्याना में आयोजित ‘जन विश्वास शिविर’ में आगर कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीणा जाते तो बस से हैं, लेकिन वापस अपनी लग्जरी गाड़ी से लौटते हैं। बस के पहुंचते ही कुछ ही देर में तमाम अधिकारियों के सरकारी वाहन पीछे-पीछे शिविर स्थल तक पहुंच जाते हैं। इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि ईंधन की बचत होना तो दूर की बात, उल्टा दोहरा खर्च हो रहा है।
जाते बस से हैं, आते लग्जरी गाड़ियों से – ग्राम भ्याना में आयोजित इस जन विश्वास शिविर में कलेक्टर आगर से तो बस में सवार होकर पहुंचे, लेकिन पीछे-पीछे उनकी गाड़ियों का पूरा काफिला भी वहां पहुंच गया। इतना ही नहीं, शिविर में मौजूद लगभग सभी अन्य अधिकारी भी अपनी-अपनी अलग-अलग गाड़ियों से वहां पहुंचे।
आयोजन स्थल पर जब वहां मौजूद गाड़ियों की गिनती की गई, तो करीब 25 लग्जरी गाड़ियां पाई गईं, जिन्हें तमाम प्रशासनिक अधिकारी लेकर पहुंचे थे। आश्चर्य की बात तो यह रही कि जिस बस को लेकर कलेक्टर साहब शिविर में पहुंचे थे, वह वापस खाली ही लौटी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब अधिकारियों को अपनी लग्जरी गाड़ियों से ही आना-जाना था, तो फिर बस ले जाने का यह दिखावा किसके लिए किया गया?
