आगर मालवा। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय आगर से जुड़े 25.10 लाख रुपये के कपटपूर्ण भुगतान मामले की जांच रिपोर्ट जिला कोषालय अधिकारी द्वारा कलेक्टर को प्रस्तुत कर दी गई है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में 10 शिक्षकों, अतिथि शिक्षकों और प्राचार्यों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की अनुशंसा की है। हालांकि, 8 महीने लंबे चले इस घटनाक्रम के बाद सामने आई यह रिपोर्ट खुद सवालों के घेरे में आ गई है।
8 महीने की जांच के बाद भी अधूरी रिपोर्ट – हैरानी की बात यह है कि 8 महीने तक चली लंबी जांच प्रक्रिया के बावजूद रिपोर्ट से वह सबसे अहम जानकारी गायब है, जिसके बिना यह जांच अधूरी मानी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों और हस्ताक्षरों से यह फर्जी भुगतान शिक्षकों के खातों में स्थानांतरित किया गया? जांच समिति इतने महीनों तक क्या करती रही कि वह मूल आदेश जारी करने वाले जिम्मेदार अफसरों के नाम ही तय नहीं कर पाई।
छोटे कर्मचारियों पर गाज, बड़े चेहरों को बचाने की आशंका – जांच रिपोर्ट में केवल बिल बनाने वालों और जिन शिक्षकों के खातों में राशि जमा हुई, उन्हीं के नाम शामिल किए गए हैं। लेकिन जिनके अप्रूवल और डिजिटल सिग्नेचर या लिखित आदेशों के बिना यह भुगतान संभव ही नहीं था, उन अधिकारियों के नामों पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि मामले में बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए जांच की दिशा को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित कर दिया गया है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस अधूरी जांच रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है और क्या उन मुख्य जिम्मेदार अधिकारियों के नामों का खुलासा हो पाएगा जिनके इशारे पर यह करोड़ों-लाखों का खेल खेला गया।
इनका कहना –जिला शिक्षा अधिकारी नितेश पांडे का कहना है कि यह मामला उनके आने के पूर्व का है, उनके द्वारा जांच में दोषी पाए गए कर्मचारियों पर FIR दर्ज करने हेतु जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है, अभिमत आने पर आगे की कारवाही की जाएगी, इसके साथ जांच में क्या कमी पेशी है इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
