आगर मालवा। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार आगर मालवा जिला जेल में अत्यंत भावुक और आत्मीय माहौल में मनाया गया। जेल की नीरस और सख्त फिजा उस वक्त रिश्तों की मिठास और आंसुओं के समंदर में बदल गई, जब सलाखों के पीछे बंद 97 कैदियों से मिलने उनकी 258 बहनें राखी बांधने पहुंचीं।
जिला जेल अधीक्षक हीरालाल परमार के मार्गदर्शन में रक्षाबंधन पर्व को लेकर जेल प्रशासन द्वारा विशेष और व्यापक प्रबंध किए गए थे। शासन के प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए बहनों को उनके कैदी भाइयों से मिलने और राखी बांधने की व्यवस्थित अनुमति दी गई। सुबह से ही जेल परिसर के बाहर बहनों का आना शुरू हो गया था, जिनके हाथों में पूजा की थाली, रंग-बिरंगी राखियां और भाइयों के लिए मिठाइयां थीं।
जैसे ही बहनों ने जेल परिसर के भीतर प्रवेश किया और अपने भाइयों को सामने देखा, माहौल बेहद भावुक हो उठा। लंबे समय बाद एक-दूसरे को सामने पाकर भाइयों और बहनों के सब्र का बांध टूट गया। आंखों से छलके आंसुओं ने वर्षों के इंतजार और जुदाई के दर्द को बयां कर दिया। बहनों ने कांपते हाथों से भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा, तिलक लगाया और आरती उतारकर उनकी लंबी उम्र तथा जल्द रिहाई की कामना की। वहीं, कैदी भाइयों ने भी अपनी बहनों का मुंह मीठा कराया और अपनी गलतियों का अहसास करते हुए भविष्य में सही राह पर चलने का संकल्प लिया।
जेल अधीक्षक हीरालाल परमार ने बताया कि रक्षाबंधन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारम्परिक मूल्यों से जुड़ा पर्व है। कैदियों के मानसिक सुधार और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए ऐसे आयोजनों का बड़ा महत्व है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, चेकिंग प्रक्रिया के बाद सभी बहनों को सुगमता से अपने भाइयों से मिलने दिया गया, ताकि त्यौहार की पवित्रता और पारिवारिक आत्मीयता बनी रहे।
पूरी मुलाकात के दौरान जेल का माहौल सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच भी मानवीय संवेदनाओं से सराबोर नजर आया। रक्षाबंधन का यह दिन बंदियों के जीवन में सुधार और अपनों के पास लौटने की एक नई उम्मीद लेकर आया।
