आगर मालवा: आजादी के 79 साल बाद भी मुक्तिधाम के लिए जद्दोजहद में गांव मोल्याखेड़ी, कीचड़, नाला, पर कर टपकते पानी को रोकने के लिए चद्दर लगार करना पड़ रहा अंतिम दाहसंस्कार, जन विश्वास शिविर भी लगा पर कोई सुविधा नहीं मिली

आगर मालवा: आजादी के 79 साल बाद भी मुक्तिधाम के लिए जद्दोजहद में गांव मोल्याखेड़ी, कीचड़, नाला, पर कर टपकते पानी को रोकने के लिए चद्दर लगार करना पड़ रहा अंतिम दाहसंस्कार, जन विश्वास शिविर भी लगा पर कोई सुविधा नहीं मिली

आगर मालवा। राजकुमार एक तरफ देश अपनी आजादी के 79 साल पूरे कर चुका है और एआई (AI) व स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीक के दावों के बीच आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में जमीनी हकीकत आज भी बेहद चिंताजनक है। नलखेड़ा तहसील के ग्राम मोल्याखेड़ी में किसी की मृत्यु हो जाने पर उसका अंतिम संस्कार करना परिजनों के लिए किसी पहाड़ खोदने जैसी चुनौती बन जाता है।

कीचड़, उफान मारता नाला और चद्दर की छत – ग्राम मोल्याखेड़ी में रविवार (6 सितंबर) को एक बुजुर्ग महिला का आकस्मिक निधन हो गया। शवयात्रा में शामिल परिजनों और ग्रामीणों को पहले कीचड़ से भरे रास्तों पर चलना पड़ा और फिर रास्ते में आने वाले नाले को पार करना पड़ा। बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव तेज हो तो ग्रामीणों को घंटों इंतजार तक करना पड़ता है। पक्का मुक्तिधाम न होने के कारण बारिश से बचने के लिए ग्रामीणों को लोहे के पाइप और चद्दर लगाकर एक अस्थाई छत तैयार करनी पड़ी, तब जाकर टपकते पानी के बीच अंतिम दाह-संस्कार संभव हो सका।

जन विश्वास शिविर में भी नहीं बनी बात- ग्रामीणों ने बताया कि 29 अगस्त (शनिवार) को गांव में ‘जन विश्वास शिविर’ का आयोजन किया गया था। इस शिविर में आईजी, डीआईजी, कलेक्टर और एसपी सहित जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे थे, अधिकारियों का दावा रहता है कि शिविर के माध्यम से मौके पर ही जनसमस्याओं का समाधान किया जाता है। ग्रामीणों ने शिविर में अधिकारियों के सामने मुक्तिधाम की समस्या को प्रमुखता से रखा था, लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका।

जमीन बंधक होने से अटका निर्माण – मामले में गांव के सरपंच प्रतिनिधि मोतीलाल बंजारिया का कहना है कि गांव का पुराना मुक्तिधाम नदी के पास था, जो नदी के तेज बहाव में बह गया था। इसके बाद एक ग्रामीण ने मुक्तिधाम निर्माण के लिए अपनी निजी जमीन पंचायत को दान में दी है, लेकिन उस जमीन पर बंधक होने के कारण फिलहाल निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।

प्रशासनिक दावों के बीच मोल्याखेड़ी के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

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