राज कुमार – आगर मालवा। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में नकली खाद का अवैध कारोबार जोरों पर है। इस क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे नकली खाद बनाने के प्लांटों में मात्र 10-15 रुपये की लागत से रंग-बिरंगी प्लास्टिक की बोरियों में नकली सामग्री पैक कर अलग-अलग ब्रांड नामों से बाजार में सप्लाई की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि शासन ने इस गोरखधंधे पर तत्काल अंकुश नहीं लगाया, तो किसानों की फसलों और आजीविका पर गहरा संकट मंडराने का खतरा है।
ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है, जहां नकली खाद के इस्तेमाल से किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। ग्राम कचनारिया के किसानों ने सहकारी संस्था से अन्नदाता कृष्णा फॉसकेम उर्वरक कंपनी का घुलनशील खाद खरीदा था। इस खाद को कद्दू, टमाटर और सोयाबीन की फसलों में डाला गया, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी खाद घुला नहीं। परिणामस्वरूप, फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
कचनारिया के किसान रघु सिंह, जिनके पास 50 बीघा से अधिक जमीन है, ने बताया, “मैंने 45 बोरी खाद लिया था, लेकिन मेरी पूरी फसल खराब हो गई।” अन्य किसानों ने भी बताया कि सोयाबीन के पौधे छोटे रह गए और फसल नष्ट हो गई। एक बोरी खाद की कीमत 700 रुपये थी, जो किसानों की मेहनत और पैसे दोनों पर भारी पड़ रही है।

कृषि विभाग और सहकारी संस्था ने प्रतिक्रिया करते हुए किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाया और खाद का सैंपल जांच के लिए लैब भेजा है।वहीं जिला कृषि अधिकारी विजय चौरसिया ने कहा, “शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, सहकारी संस्था ढोटी के प्रबंधक राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 700 बोरियां खाद वितरित की गई थीं, लेकिन उन्होंने पहले ही इसकी खराब गुणवत्ता की शिकायत की थी और दूसरा खाद देने की सलाह दी थी।
