जनविश्वास शिविर से उठा जनता का विश्वास! समस्या बताने आए ग्रामीणों से बीच में छीना माइक, नाराजगी के बीच एसीएस ने छोड़ा मंच

जनविश्वास शिविर से उठा जनता का विश्वास! समस्या बताने आए ग्रामीणों से बीच में छीना माइक, नाराजगी के बीच एसीएस ने छोड़ा मंच

राजकुमार – आगर-मालवा। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत ग्रामीणों की समस्याएं सुनने और उनका निराकरण करने के उद्देश्य से शुक्रवार को ग्राम कराडिया में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उस समय स्थिति असहज हो गई, जब अपनी बात रख रहे ग्रामीणों से बीच में ही माइक छीन लिया गया। अधिकारियों के इस रवैये से ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई, जिसके बीच अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे मंच छोड़कर चले गए।

शिविर में एसीएस संजय दुबे के साथ कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीणा, पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी, विधायक मधु गहलोत, भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय सहित जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन का दावा था कि शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर मौके पर ही उनका निराकरण करना है, लेकिन धरातल पर नजारा इसके विपरीत नजर आया।

पीरूलाल और प्रेम यादव का माइक छीना – शिविर के दौरान ग्रामीण पीरूलाल यादव ने माइक पर गांव में शौचालय, सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा उठाना शुरू किया। वे अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाए थे कि उनसे माइक छीन लिया गया। इसके बाद ग्रामीण प्रेम यादव बिजली से जुड़ी गंभीर समस्या लेकर पहुंचे और अधिकारियों को आपबीती सुनाने लगे, लेकिन उनके साथ भी यही बर्ताव दोहराया गया। एक के बाद एक दो ग्रामीणों से माइक छीने जाने से वहां मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और शिविर में हंगामा खड़ा हो गया।

ग्रामीणों के आक्रोश के बीच मंच से रवाना हुए एसीएस – प्रशासनिक रवैये से ग्रामीणों में पनपे आक्रोश और असहज होते माहौल को देखते हुए एसीएस संजय दुबे कार्यक्रम के बीच में ही मंच छोड़कर चले गए। उनके जाने के बाद जैसे-तैसे शिविर की औपचारिकता पूरी की गई।

प्रशासनिक व्यवस्था और मंशा पर उठे सवाल – जनविश्वास अभियान का मूल उद्देश्य आमजन की शिकायतों को सुनना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका तत्काल समाधान निकालना है। ऐसे में फरियादियों को अपनी बात तक न रखने देना और उनसे माइक छीन लेना शिविर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कराडिया के इस घटनाक्रम ने यह सवाल छोड़ दिया है कि क्या जनसमस्या निवारण शिविर महज एक औपचारिकता बनकर रह गए हैं? अब देखना यह होगा कि पीरूलाल यादव और प्रेम यादव द्वारा उठाई गई बुनियादी समस्याओं पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है, क्योंकि जनविश्वास कागजी दावों से नहीं, बल्कि धरातल पर जनता की सुनवाई और समस्याओं के समाधान से ही कायम होता है।

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