अस्पताल या रैन बसेरा? आगर जिला अस्पताल में बिना कोई ठोस वजह मरीज शिफ्टिंग का खेल; नई बिल्डिंग खाली, बरामदे और जमीन पर कराहते मरीज, कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी लाचार व्यवस्था

अस्पताल या रैन बसेरा? आगर जिला अस्पताल में बिना कोई ठोस वजह मरीज शिफ्टिंग का खेल; नई बिल्डिंग खाली, बरामदे और जमीन पर कराहते मरीज, कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी लाचार व्यवस्था

राजकुमार – आगर मालवा। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के दावे के बीच एक बार फिर बदहाल हालात सामने आए हैं। कुछ माह पहले ही जिला अस्पताल का संचालन नए भवन में शुरू किया गया था, लेकिन अब नए भवन में भर्ती मरीजों को पुराने भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण कई मरीजों को वार्ड के बाहर बरामदे में ही उपचार लेना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भर्ती मरीजों का आरोप है कि महिला वार्ड में तैनात स्टाफ का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं है। मरीजों का कहना है कि उपचार के लिए आने के बाद उन्हें व्यवस्थाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद ओपीडी पंजीयन के लिए महज एक महिला और एक पुरुष काउंटर संचालित हो रहा है। इसी तरह खून और पेशाब की जांच के लिए भी केवल एक काउंटर उपलब्ध होने से मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। घंटों इंतजार के बाद मरीजों को जांच की सुविधा मिल पा रही है।

कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी हालात जस के तस – कुछ दिन पूर्व कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीणा ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नए भवन में सुविधाएं शुरू होने के बाद मरीजों को वापस पुराने भवन में शिफ्ट किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्टाफ की कमी बनी वजह : सिविल सर्जन – मामले को लेकर जब सिविल सर्जन डॉ. मनीष कुरील से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है। सेवाएं देने में कठिनाई हो रही थी, जिसके चलते मरीजों को पुराने भवन में शिफ्ट किया गया है।

अब सवाल यह है कि यदि नए भवन में अस्पताल संचालन शुरू कर दिया गया था तो पर्याप्त स्टाफ और व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए बिना मरीजों को वहां भर्ती क्यों किया गया? जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक उपचार कब मिलेगा, यह सवाल जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा हो रहा है।

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