ओमप्रकाश – आगर मालवा। मध्य प्रदेश में अतिवर्षा, बाढ़ और फिर पीला मोजेक वायरस से खबर हुई सोयाबीन फसल की भरपाई के लिए प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव ने 02 अक्टूबर को 13 जिलों के प्रभावित 8,84,772 किसानों के खातों में सिंगल क्लिक से 653.34 करोड़ की राहत राशि अंतरित की है।
इसमें वे किसान भी शामिल हैं, जिनकी सोयाबीन की फसल पीला मोजेक वायरस और कीट व्याधि से प्रभावित हुई थी। ऐसे 4.94 लाख किसानों को 322 करोड़ रुपये सहायता दी गई। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित 3.90 लाख किसानों के खातों में 371 करोड़ की राहत राशि अंतरित की गई।

लेकिन आगर मालवा जिले के किसान इस मुआवजा की राशि से वंचित रह गए हैं, मुआवजे की सूची में आगर जिला का नाम ही नहीं है, बता दें कि आगर जिले के किसानों की भी फसल पिला मोजेक वायरस से बुरी तरह बर्बाद है जिससे किसान हताश है। विपक्ष के नेता सहित सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने भी जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, पत्र के माध्यम से एवं सोशल मीडिया के जरिए जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि प्रशासन अगर समय पर खराब फसल का सर्वे कर पाते तो आज आगर मालवा जिले के किसान भाइयों को भी मुआवजा मिल पाता।
आगर मालवा जिले में किसानों को खराब फसलों का मुआवजा नहीं मिलने पर अब राजनीति भी तेज हो गई है। आगर मालवा जिले में सुसनेर से कांग्रेस विधायक भेरू सिंह परिहार बापू ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक बापू का कहना है कि जिले को मुआवजा सूची से बाहर रखकर किसानों के साथ खुला अन्याय किया गया है।
विधायक बापू ने किसानों की नाराज़गी को आवाज़ देते हुए नेताओं और अधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को बीमा कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर खराब फसलों की जांच गलत तरीके से कराई गई।

वहीं सत्ताधारी पार्टी से आगर विधायक माधव सिंह गहलोत ने भी प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है, जिसमे उल्लेखनीय है कि आगर मालवा जिले में भी अतिवृष्टि एवं पीला मोजेक वायरस से कई ग्रामों में किसानों की सोयाबीन की फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिसक राजस्व के अधिकारियों से तत्काल सर्वे करवा कर आगर जिले के किसान भाइयों को मुआवजा राशि वितरण की जाए।
