मरने के बाद भी नसीब में नहीं इज्जत की विदाई, आगर मालवा जिले में गिरते पानी में डीजल, टायर की सहायता से करना पड़ा बुजुर्ग का दाह-संस्कार

मरने के बाद भी नसीब में नहीं इज्जत की विदाई, आगर मालवा जिले में गिरते पानी में डीजल, टायर की सहायता से करना पड़ा बुजुर्ग का दाह-संस्कार

ओमप्रकाश। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिला मुख्यालय के समीपस्थ गांव आवर के नई आबादी वाले कस्बे में शमशान के अभाव में खुले जंगल में दाह-संस्कार करने को ग्रामीण मजबूर हैं, अगर यहां बारिश के दिनों में किसी की मृत्यु हो जाती है तो गिरते पानी में गीली जगह पर डीजल व टायर की सहायता से मृतक को अंतिम विदाई दी जाती हैं, क्योंकि इन ग्रामीणों के पास शमशान नहीं है लंबे समय से शमशान की मांग भी उठाई गई लेकिन वह अभी तक पूरी नहीं हुई, एक और देश आजादी की 79 वीं वर्षगांठ मना रहा हैं तो वहीं यह ग्रामीण शमशान के लिए जद्दाजोहट उठा रहे हैं।

ताजा मामला आगर मालवा जिले के आवर गांव के नई आबादी क्षेत्र अर्जुन नगर कालोनी का है जहां पर शुक्रवार को एक बुजुर्ग छीतुलाल लाल की गंभीर बीमारी के चलते आकस्मिक मौत हो गई, जिसकी अंतिम विदाई के लिए परिजन उसे मुक्तिधाम लेकर पहुंचे लेकिन मुक्तिधाम तो खुले जंगल में है वहां ना तो कोई टीन शेड है नहीं कोई सुख सुविधा ऐसे में बारिश शुरू हो गई और बारिश ने इन परिजनों की समस्या को और भी बढ़ा दिया, बड़ी मुश्किल से परिजनों ने पॉलीथिन (बरसाती) से छत बनाकर डीजल-टायर की सहायता से बुजुर्ग को अंतिम विदाई दी। ग्रामीण का कहना है कि वह श्मशान के लिए कई बार मांग उठा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम प्रशासन द्वारा नहीं उठाए गए।

इस मामले में सरपंच गोवर्धन सिंह से फोन पर चर्चा की गई तो उनके द्वारा कहा गया कि उनके द्वारा शमशान की बनाने को लेकर शासन स्तर पर प्रयास किया जा रहे हैं, शमशान की फाइल आगर एसडीम ऑफिस में पड़ी हुई है लेकिन बाबू उस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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