सीएम हेल्पलाइन पर की शिकायत वापस नहीं ली तो आगर नगर पालिका ने बुजुर्ग महिला के घर पहुंचाया नोटिस, नगर पालिका की शिकायत करना अब हो गया गुनाह, शिकायतकर्ता को नोटिस के जरिए धमकाने का प्रयास

सीएम हेल्पलाइन पर की शिकायत वापस नहीं ली तो आगर नगर पालिका ने बुजुर्ग महिला के घर पहुंचाया नोटिस, नगर पालिका की शिकायत करना अब हो गया गुनाह, शिकायतकर्ता को नोटिस के जरिए धमकाने का प्रयास

ओमप्रकाश – आगर मालवा। नगर पालिका परिषद आगर मालवा में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत अब चर्चा का विषय बन गई है। यदि किसी ने नगर पालिका से सम्बंधित शिकायत 181 पर की तो अधिकारी समस्या का निराकरण करने की बजाय शिकायतकर्ता के ऊपर दबाव बनाकर शिकायत बंद करने में जुट जाते है और ज़ब शिकायतकर्ता शिकायत वापस नहीं लेता है तो नगर पालिका दूसरे तरीको से उस पर दबाव बनाने में लग जाती है ऐसा ही एक मामला आगर मालवा निवासी कमलेश परमार के साथ हुवा है कमलेश ने नगर पालिका में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की थी. शिकायत का निराकरण करने की बजाय अधिकारी कमलेश पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगे. शिकायत वापस न लेने पर नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करते हुए उनके पैतृक मकान जो की उनकी दादी ललिता बाई पति पुरालाल के नाम पर है, के संबंध में नोटिस क्रमांक न.पा./राज./3474 दिनांक 15/09/2025 जारी कर दिया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नोटिस में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 का हवाला देकर कार्रवाई प्रस्तावित करने की बात कही गई है, जबकि यह अधिकार केवल तहसीलदार/एसडीएम को प्राप्त है, नगर पालिका को नहीं। इस प्रकार नोटिस जारी कर CMO ने अपने पद का खुला दुरुपयोग किया है।

गौरतलब है कि संबंधित पैतृक मकान का नामांतरण वर्ष 2024 में ही नगर पालिका द्वारा विधिवत कर दिया गया था, जिसकी प्रति भी उपलब्ध है। नामांतरण प्रक्रिया में करों और बकाया राशि की जाँच अनिवार्य होती है। ऐसे में दोबारा नोटिस जारी करना केवल प्रताड़ना और दबाव की कार्रवाई है।

शिकायतकर्ता कमलेश परमार का कहना है कि –> “नगर पालिका का यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास है। किसी भी मामले में सीएम हेल्पलाइन कर आवाज़ उठाने पर डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। यदि प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो हम माननीय न्यायालय की शरण लेंगे।”

यह पूरा मामला अब जिला कलेक्टर, भोपाल नगरीय प्रशासन विभाग, उज्जैन संभाग आयुक्त और मानवाधिकार आयोग तक पहुँच चुका है। पीड़ित ने माँग की है कि दोषी अधिकारी पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

ज़ब इस संबंध में नगर पालिका आगर मालवा के सीएमओ कुशलसिंह डोडवे से बात करना चाही लेकिन उनका फ़ोन बंद आया वही उनसे मिलने नगर पालिका भी गए लेकिन वे वहाँ पर भी मौजूद नहीं थे.

साथ ही इस संबंध में एसडीएम आगर मिलिंद ढोके से बात की गई तो उन्होंने बताया की भू राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान राजस्व विभाग के पास है. यदि उन्हें कोई कार्रवाई करना है तो वे नगर पालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई करे।

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