कुकुरमुत्ते की तरह गलियों- गलियों में संचालित हो रहे झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक, आम जनता की जान के साथ कर रहे खिलवाड़, स्वास्थ विभाग की मिली भगत से चल रहा कामकाज

कुकुरमुत्ते की तरह गलियों- गलियों में संचालित हो रहे झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक, आम जनता की जान के साथ कर रहे खिलवाड़, स्वास्थ विभाग की मिली भगत से चल रहा कामकाज

राज कुमार – आगर मालवा। Agar malwa news: मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने पूर्व में मध्य प्रदेश के सभी कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश दिया गया था कि, वह अपने क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान शुरू कर उचित दंडनीय कार्रवाई करें। ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए जिनके पास कोई डिग्री डिप्लोमा नहीं है लेकिन फिर भी वह स्वयं को डॉक्टर बताते हैं।

लेकिन आगर मालवा जिले में इसका उल्टा असर देखने को मिल रहा है, यहां पर इन झोलाछाप डॉक्टरों का कारखाना खूब फल फूल रहा है, यह स्वास्थ विभाग से सांठ-गांठ कर अपना कारखाना खूब फैला रहे हैं। यह कुकुरमुत्ते की तरह गलियों गलियों में हो गए हैं और लोगों का इलाज कर रहे हैं, पूर्व में जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए अभियान भी चलाया था लेकिन वह अभियान सिर्फ छोटे-मोटे झोलाछाप डॉक्टर तक ही सिमट गया था

और जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए गए थे। वह महज कुछ ही दिनों बाद फिर से संचालित होने लगे हैं, अगर इन झोलाछाप डॉक्टरों की कोई आम नागरिक या प्रतिष्ठित व्यक्ति शिकायत करता है तो झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा राजनेतिक स्तर से शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया जाता है वह उसे उल्टे सीधे कैसे में फसाने की धमकी दी जाती है जिस वजह से कोई भी आम नागरिक इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ आवाज नहीं उठा पता है।संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्य प्रदेश से समस्त कलेक्टर एवं समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नाम जारी परिपत्र क्रमांक 248 दिनांक 15 जुलाई 2024 में स्पष्ट लिखा गया था कि, मध्य प्रदेश में कई अपात्र व्यक्तियों द्वारा फर्जी मेडिकल डिग्री अथवा सर्टिफिकेट का प्रयोग करके अमानक चिकित्सा पद्धतियों के उपयोग से मरीज का इलाज किया जा रहा है।

बहुत सारे ऐसे व्यक्ति एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज कर रहे हैं जिन्होंने मेडिकल की कोई डिग्री, डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया है और जो विधि के अनुसार एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने के लिए अधिकृत नहीं है।मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि अपने नाम के साथ डॉक्टर शब्द कौन लिख सकता है,निर्देशित किया जाता है कि ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। यह भी उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षा संस्था (नियंत्रण) अधिनियम, 1973 यथा संशोधित अधिनियम, 1975 एवं संशोधन अधिनियम, 2006 की धारा 7-ग अनुसार ” ‘डॉक्टर’ अभिधान का उस व्यक्ति के नाम के साथ उपयोग किया जा सकेगा, जो कोई मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय अर्हता धारित करता हो और जो तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा स्थापित किसी बोर्ड या परिषद् या किसी अन्य संस्था में चिकित्सा व्यवसायी के रूप में रजिस्ट्रीकृत है तथा अन्य कोई व्यक्ति स्वयं को चिकित्सा व्यवसायी के रूप में अभिव्यक्त करने के लिए ‘डॉक्टर’ अभिधान का उपयोग नहीं करेगा” अगर कोई झोलाछाप डॉक्टर, “डॉक्टर अभियान” शब्द का उपयोग करता है तो उसके विरुद्ध उपरोक्त वर्णित अधिनियम की धारा 7-ग के उल्लंघन में कारावास की कालावधि 03 वर्ष तक व जुर्माना पचास हजार रुपये तक का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि धारा 7-ग का संबंध गैर मान्यता प्राप्त चिकित्सकों से है। म.प्र उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 की धारा 03 का उल्लघंन, न्यायालय में दोषसिद्धी (Conviction) होने पर दण्डनीय है जिसके प्रावधान धारा 8 में वर्णित हैं।

इनका कहना – मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आगर डॉ राजेश गुप्ता का कहना है कि हमने पूर्व में भी कहीं झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही है, ज्यादा व्यस्तता की वजह से बीच में कारवाही रुक गई थी, जिन्हें फिर से संचालित किया जाएगा और झोलाछाप डॉक्टरों पर फिर से उचित कार्रवाई की जाएगी।

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