रिजवान खान – आगर मालवा. जिला मुख्यालय स्थित शासकीय जिला अस्पताल में शनिवार सुबह प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो जाने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और जिम्मेदार डॉक्टर व स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।

दरअसल नलखेड़ा के बड़ागांव निवासी मृतका यासमीन पति इकबाल उम्र 31 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे नलखेड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां से उसे आगर जिला अस्पताल में रेफर किया गया। जहां सुबह 11:11 बजे उसका प्रसव हुआ जिसमे उसने एक मृत शिशु को जन्म दिया तत पश्चात महिला की भी मौत हो गई, आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी तहरीर में लिखा कि बच्चे की पेट में ही मौत हो गई थी
लेकिन डॉक्टर ने यह बात परिजनों से छुपाई और मृत शिशु की नॉर्मल डिलीवरी कर दी गई जिसके चलते महिला की भी मौत हो गई, परिजनों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद डॉक्टर ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके चलते पहले शिशु और फिर मां की मौत हो गई।घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर सुरक्षित मातृत्व योजना को सिर्फ कागजों तक सीमित रखने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार सुरक्षित प्रसव को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर मामला शांत कराने का प्रयास किया। वहीं अस्पताल प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है। अस्पताल के प्रभारी अधिकारी ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना से अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। यह मामला एक बार फिर शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित मातृत्व प्रसव की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
