जल ही जीवन लेकिन जल नहीं तो जीवन कैसा, पिपल्या कुम्हार गांव के ग्रामीण पीने का पानी मांगने पहुंचे आगर कलेक्टर के पास, कहा साहब सोना नहीं पानी चाहिए थोड़ा जल्दी दे दीजिए!

जल ही जीवन लेकिन जल नहीं तो जीवन कैसा, पिपल्या कुम्हार गांव के ग्रामीण पीने का पानी मांगने पहुंचे आगर कलेक्टर के पास, कहा साहब सोना नहीं पानी चाहिए थोड़ा जल्दी दे दीजिए!

राजकुमार – जल ही जीवन लेकिन जल नहीं तो जीवन कैसा के नारे के साथ मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के ग्राम पिपल्या कुम्हार के ग्रामीण आगर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे जहां पर उन्होंने गुहार लगाई की सर हमें भीषण गर्मी में पीने का पानी नहीं मिल रहा है, नाही पानी की लाइन डाली हुई है ना ही ऐसे संसाधन है जिससे हमें पीने के पानी की व्यवस्था हो सके और जो संसाधन है वह काफी दूर है।

दरअसल मंगलवार को आगर कलेक्ट्रेट कार्यालय में उस समय माहौल देखने को मिला जब ग्राम पिपल्या कुम्हार के ग्रामीण एवं महिलाएं कलेक्टर के पास पीने की पानी की व्यवस्था की गुहार लगाने पहुंचे, उन्होंने मांग की की इस भीषण गर्मी में जीवन व्यापन के लिए इंसान सहित वन्य जीव का भी एक ही साधन होता है वह है पानी लेकिन ऐसी भीषण गर्मी में हमें पीने के पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है ना ही हमें पंचायत से कोई राहत दी जा रही है ना ही शासन स्तर पर कोई राहत दी जा रही है, पीने के पानी के लिए सुबह 5:00 बजे से ही मशक्कत करना पड़ती है महिलाएं अपने सिर पर तो पुरुष बाइक एवं साइकिल पर पानी के बर्तनों को लाद कर व्यवस्था में जुट जाते हैं, पुरुष रोजगार पर निकलने से पहले उन्हें सबसे पहले पानी की व्यवस्था को पूरा करना पड़ता है, उनके जीवन काल में पानी एक ऐसा हिस्सा बन गया है जैसे मानो किसी खदान से कोई खजाना निकालकर लाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने शासन को यह भी अवगत कराया कि उनके गांव में पानी के लिए बहुत बड़ा डेम है लेकिन पानी की व्यवस्था सुचारु करने के लिए कोई साधन नहीं है, अगर वहां डैम से पानी लाइन एवं टंकी की व्यवस्था की जाए तो उन्हें पीने एवं रोजमर्रा के जीवन के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो सकती है।

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